आज ये हूँ मैं
एक नाम, एक पहचान हूँ मैं
ज़िन्दगी को खुद में समेटे हुए एक इंसान हूँ मैं
थोड़ा शरारती थोड़ा शैतान हूँ मैं
कभी जला कभी बुझा,उस दिए के समान हूँ मैं
अंधेरों में रोशनी का उदगार हूँ मैं
कभी भूला कभी टूटा वही ख्वाब हूँ मैं
उसी ख्वाब को पूरा करने को तैयार हूँ मैं
किसी की ममता किसी का दुलार हूँ मैं
उस ममता से ही तो साकार हूँ मैं ||
एक विश्वास, एक अहंकार हूँ मैं
उसी विश्वास का तो जीवित प्रमाण हूँ मैं
किसी की उलझन तो किसी का इंकार हूँ मैं
उन्हीं उलझे से सवालों का जवाब हूँ मैं
एक तरफ इश्क और उसका इन्तजार हूँ मैं
उसकी आहों का ही शिकार हूँ मैं
ज़िन्दगी की जरुरत, किसी का स्वार्थ हूँ मैं
उन खुदगर्जों से ऊब चुका एक अधूरा प्राण हूँ मैं
किसी का दुश्मन और उनका मुखालिफ़ हूँ मैं
वैरी को भूलनेवाला एक यार हूँ मैं ||
हाँ, सच कहता हूँ
इस दर्द-ऐ- दिल को बयाँ करने वाला एक इंसान हूँ मैं
गिर कर सिखने वाला एक नौजवान हूँ मैं
कुल में रौशन दीपक , उसका ताज़ हूँ मैं
ख़ुद में ढूंढा ख़ुद को तो पाया कुलदीप हूँ मैं…… ||
Ab yahi baki rah gaya tha.....
ReplyDeleteumda yaar..
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